यूँ गुम सा, क्यूँ ख़ामोश है तूँ ?
सच हैं तूँ, या एक सोच है तूँ?
पिछले पल तो था,
अब क्यूँ लापता?
आ मेरी उँगलियों से ज़रा,
अपनी उँगलियाँ तो मिला,
अपनी साँसों से ज़रा,
मेरी धड़कन को खिला,
पलकों को झपका के,
इशारों से बता,
अपना सा बुलाके,
मुझे अपना ले बना।