Touch Starvation……(2)

यूँ गुम सा, क्यूँ ख़ामोश है तूँ ?

सच हैं तूँ, या एक सोच है तूँ?

पिछले पल तो था,

अब क्यूँ लापता?

आ मेरी उँगलियों से ज़रा,

अपनी उँगलियाँ तो मिला,

अपनी साँसों से ज़रा,

मेरी धड़कन को खिला,

पलकों को झपका के,

इशारों से बता,

अपना सा बुलाके,

मुझे अपना ले बना।

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